शुक्रवार, 2 जनवरी 2026

मंदिर के कपाट

 

 

नवागन्तुक समय प्रतीक्षारत देहली पार  

देहली के भीतर रच-बस गया है अतीत


बीते कल की नब्ज़ थाम करना स्वागत

चुनौतियाँ मिलेंगी करते ही चौखट पार


खुलते ही द्वार होता संभावना का जन्म 

हवा-पानी,गंध,धूप और धूल का पदार्पण 


ठोक-पीट सिखाता जीवन का शिष्टाचार 

अनुभव और अनुभूति के सहज नेगाचार


मन की वीथियों के छूटें जब द्वंद और फंद 

तब खुलते हैं स्वत: सानंद मंदिर के कपाट

 

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                    कोलम कलाकार : श्री करन पति

गुरुवार, 1 जनवरी 2026

समय के साथ चल


समय लेता है करवट हर बरस

जैसे मुट्ठी से रेत जाए फिसल


हर बीता पल समय का स्पंदन

लहर-लहर बहता नदी का जल


घूम-फिर कर फिर लौटेगा कल

क्षितिज तक नाव अपनी ले चल


आगे न पीछे समय के साथ चल

अपने बल पर मुकाम हासिल कर

 

 

शनिवार, 15 नवंबर 2025

पेंसिल


बच्चे किताबें पढ़ें,
अच्छी किताबें गुनें,
नई-नई बातें सीखें।

कल्पना के पर तोलें,
सारा आकाश नापें,
नभ से धरती को देखें ।

खेलें-कूदें, चोट से न डरें,
अनुभव गुणा-भाग करें,
मिल कर सवाल हल करें ।

इस छोटी-सी दुनिया में
बङे जिगर वाले ख़्वाब देखें
हौसले बुलंद करें बङों के..

पहाङ,नदी, वृक्ष की छाँव बनें..
जिस धुरी पर टिकी है पृथ्वी
उसी पेंसिल के भरोसे है दुनिया ।